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विश्‍व स्‍तनपान सप्‍ताह (1 अगस्‍त से 7 अगस्‍त पर विशेष)

रामबेलास,

आपके बच्‍चों को जीवन भर की मुस्‍कान देगा स्‍तनपान

  •    जन्म के पहले घंटे के भीतर का स्तनपान, बनेगा जीवन का वरदान
  •    छ्ह माह तक दें केवल माँ का दूध, निमोनिया-डायरिया न आएगा पास

संतकबीरनगर, 31 जुलाई 2019 ।
बच्चे के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माँ का दूध (स्तनपान) बहुत ही जरूरी होता है। माँ के दूध में शिशु की आवश्यकतानुसार पानी होता है, इसलिए छ्ह माह तक के बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है। इसलिए बच्चे की मुस्कान बनाए रखने के लिए छ्ह माह तक केवल माँ का दूध पिलाना चाहिए। इसके अलावा स्तनपान बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा करने के साथ ही सुरक्षा का बोध भी कराता है। आंकड़े भी बताते हैं कि छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में भी क्रमशः 11 फीसद और 15 फीसद तक कमी लायी जा सकती है। स्‍तनपान को बढ़ावा देने के लिए विश्‍व स्‍तनपान सप्‍ताह 1 अगस्‍त से 7 अगस्‍त तक मनाया जाएगा।

संयुक्‍त जिला चिकित्‍सालय संतकबीरनगर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ आर पी राय  का कहना है कि यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। बच्चे को छ्ह माह तक लगातार केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार के रूप में  काम करता है। बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है। इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके माँ का दूध पिलाते रहना चाहिए। माँ का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है। अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा है और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती हैं जो कि एक भ्रांति के सिवाय और कुछ नहीं है। माँ के दूध में भरपूर पानी और पोषक तत्व होते हैं इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ भी नहीं देना चाहिए। बाहर की चीज खिलाने से बच्चे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

उत्‍तर प्रदेश में स्‍तनपान की दर अन्‍य प्रदेशों से कम

डीसीपीएम संजीव सिंह बताते हैं कि नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार प्रदेश में एक घंटे के अन्दर स्तनपान की दर अभी मात्र 25.2 प्रतिशत है जो कि काफी कम है। छह माह तक केवल स्तनपान की दर 41.6 फीसद है जो कि अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम है। लखनऊ की बात करें तो यहाँ एक घंटे के अन्दर स्तनपान की दर अभी मात्र 22.3 प्रतिशत ही है जबकि छह माह तक केवल स्तनपान की दर 47 फीसद है। दूसरी तरफ पीएलओएस वन जर्नल रिपोर्ट ब्रेस्‍ट फीडिंग मेटोनालिसिस रिपोर्ट 2017 के अनुसार जन्म के पहले घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने से नवजात मृत्यु दर में 33 फीसद तक कमी लायी जा सकती है। वहीं 2008 में हुए एक अन्‍य शोध के अनुसार छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 फीसद और 15 फीसद कमी लायी जा सकती है। 

स्‍तनपान से बच्‍चे को फायदा

बच्‍चे से भावनात्‍मक लगाव व सुरक्षा का बोध। दस्‍त और निमोनिया के खतरे में कमी आती है। मां का पहला पीला गाढ़ा दूध रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।बच्‍चों में बाहरी संक्रमण का खतरा नहीं रहता है। नवजात बच्‍चों के मृत्‍युदर में कमी लाई जा सकती है।

मां को भी है स्‍तनपान का फायदा

स्‍तनपान का फायदा बच्‍चे को ही नहीं मां को भी होता है। यह स्तन व डिम्बग्रंथि के कैंसर की संभावना को कम करता है। यह प्रसव पूर्व खून बहने और एनीमिया की संभावना को कम करता है। यह मां को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना वापस प्राप्त करने में सहायता करता हैं। स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच मोटापा सामान्यत: कम पाया जाता है।

स्‍तनपान के अन्य सामाजिक लाभ

स्तनपान बच्चों में मृत्यु-दर/मृत्यु अनुपात को कम करता है। स्तनपान करने वाले बच्चों में अच्छी प्रतिरक्षा प्रणाली का विकास होता है तथा वे कई प्रकार की घातक की बीमारियों से बचने में सक्षम बनते है। इसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य बजट में कमी हो आती है।

‘‘ जिले में स्‍तनपान सप्‍ताह ‘स्‍तनपान विकल्‍प नही, संकल्‍प है’ के नारे के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान पूरे स्‍प्‍ताह जिला व ब्‍लाक स्‍तर पर स्‍तनपान को बढ़ावा देने वाली संगोष्ठियों के साथ ही अन्‍य क्रियाएं की जाएंगी। ताकि स्‍तनपान को बढ़ावा मिल सके। प्रसव के एक घण्‍टे के अन्‍दर कराया गया स्‍तनपान बच्‍चों के लिए वरदान हैं। स्‍तनपान सप्‍ताह पर जागरुकता पैदा करने के लिए विविध गतिविधियों के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।’’

डॉ हरगोविन्‍द सिंह

मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी

फोटो –

1-  डॉ आर पी राय, बाल रोग विशेषज्ञ

2-  स्‍तनपान सप्‍ताह का लोगो

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