गोरखपुर

कोरोना में प्रसव के लिए वरदान साबित हो रहे हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

सौरभ पाण्डेय

गोरखपुर:- खोराबार के रहने वाले सतीश कुमार की पत्नी नीलम कुमारी को प्रसव पीड़ा हुई तो आशा कार्यकर्ता सविता की मदद से वह खोराबार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां 11 सितम्बर को नार्मल डिलेवरी हुई। सतीश का कहना है कि प्रशिक्षित स्टॉफ ने सुरक्षित तरीके से प्रसव करवाया। खोराबार की व्यवस्था से वह संतुष्ट हैं और सभी स्टॉफ काफी मेहनती हैं। सबसे अच्छी बात यह है अस्पताल में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।

केस दो-

सरदारनगर के लक्ष्मणपुर गांव की रहने वाली राधिका देवी का कहना है कि उन्हें सरकारी अस्पतालों पर बिल्कुल भरोसा नहीं था। लेकिन 9 अप्रैल को सरदारनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुए उनके संस्थागत प्रसव के बाद उनकी धारणा बदली है। प्रसव के बाद उन्हें भोजन और दवाएं देने के अलावा चिकित्सक की देखरेख में नवजात का निरीक्षण भी किया गया। लॉकडाउन के कारण वह डरते-डरते सरकारी अस्पताल गई थीं लेकिन अब वह व्यवस्था की सराहनी करते नहीं थकतीं।

उपरोक्त दोनों केस तो सिर्फ बानगी भर हैं। लॉकडाउन और उसके बाद कोरोना के प्रसार के बीच जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) प्रसव के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। अप्रैल से लेकर अगस्त माह तक जिले में 6504 महिलाओं ने इन पीएचसी से नार्मल डिलेवरी की सुविधा प्राप्त की है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टॉफ जच्चा-बच्चा की कुशलता का खासतौर से ध्यान रखते हैं।

सरदारनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. हरिओम पांडेय का कहना है कि धीरे-धीरे सरकारी अस्पतालों के बारे में लोगों की धारणा बदल रही है। लॉकडाउन के समय में तो एकमात्र विकल्प के तौर पर पीएचसी ने बेहतर सेवाएं दी हैं। किसी भी सरकारी अस्पताल पर प्रसव करवाने के लिए आशा कार्यकर्ता की मदद ली जा सकती है या फिर 102 नंबर एंबुलेंस सेवा ली जानी चाहिए। पीएचसी पर प्रसव की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहती है।

खोराबार पीएचसी के स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी श्वेता पांडेय और ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर विकास ने बताया कि गर्भवती को पीएचसी से कई प्रकार की सुविधाएं मिलती हैं। गर्भधारण के साथ ही प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में पंजीकरण करवा लेना चाहिए। इसमें आशा कार्यकर्ता मदद करती हैं। पंजीकरण कराने के बाद तीन किश्तों में 5000 रुपये मां के पोषण के लिए दिये जाते हैं। प्रत्येक महीने की 09 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रसव पूर्व सभी प्रकार की जांच निःशुल्क की जाती है। इस दिवस पर जांच करवाने का फायदा यह रहता है कि अगर कोई महिला उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) वाली हैं तो उन्हें पहले से ही चयनित कर सही अस्पताल में जाने का परामर्श दिया जाता है और मदद भी की जाती है।

कुल 18113 प्रसव हुए

मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि कोरोना काल में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जिले में कुल 18113 संस्थागत प्रसव हुए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ड्रिस्ट्रिक्ट डेटा मैनेजर पवन कुमार और उनकी टीम सभी सरकारी अस्पतालों में हुए प्रसव की रिपोर्टिंग करती है जिससे शासन को भी अवगत कराया जाता है। अप्रैल से लेकर अगस्त माह तक बीआरडी मेडिकल कालेज में 862 नार्मल, 457 सीजेरियन, जिला महिला अस्पताल में 2148 नार्मल, 725 सीजेरियन, सीएचसी पर 1867 नार्मल, 51 सीजेरियन और एएनएम सब सेंटर्स पर 2574 नार्मल डिलेवरी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र में सीजेरियन डिलेवरी को हतोत्साहित करने का प्रयास है। कोशिश होती है कि विशेष परिस्थिति में ही सर्जरी की जाए।

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