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अखिलेश मिश्र ने प्रधान पद के आरक्षण पर उठाए सवाल, निर्वाचन अधिकारी को लिखा पत्र


मुनीर आलम

अखिलेश मिश्र पुत्र मधुसूदन मिश्र निवासी ग्राम पंचायत बेलौही पोस्ट लालपुर विकास खण्ड बृजमनगंज तहसील फरेंदा जनपद महाराजगंज ने निर्वाचन अधिकारी को लिखत पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि मैं ग्राम पंचायत प्रधान पद के आरक्षण के सम्बन्ध में निम्न बिंदुओं की तरफ आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूँ (1)1995 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावी आरक्षण योजना प्रथम चार कार्यान्वित होने के समय मेरे ग्राम पंचायत का नाम बेलवही ( बेलौही ) था जिसमें रायपुर पण्डित ग्राम सम्मिलित किया गया था । (2)1995 में बेलवही (बेलौही ) का आरक्षण अनुसूचित जाति का था जिसके निर्वाचित प्रधान बबुल्ले पासवान थे । (3)1995 में बेलवही ( बेलौही ) न्याय पंचायत केंद्र था और आज भी है इसी आधार पर रायपुर पण्डित में अधिक आबादी होने के बावजूद तत्कालीन व्यवस्था में सम्मिलित ग्राम पंचायत का नाम बेलवही ( बेलौही ) रहने दिया | (4)चोरी छुपे कुछ शातिर तत्वों ने दिसंबर 1999 के बाद और प्रस्तावित ग्राम पंचायत चुनाव पूर्व ग्राम पंचायत का नाम परिवर्तित करा कर रायपुर पण्डित करा दिया । (5) विगत ( 2015 ) पंचायत चुनाव आरक्षण प्रक्रिया में बेलवही ( बेलौही ) और रायपुर पण्डित ग्राम पंचायतें अलग – अलग होने के बाद रायपुर पण्डित के स्थान पर बेलवही ( बेलौही ) को आरक्षित किया गया जबकि रायपुर पण्डित को ही आरक्षण के अन्तर्गत अनुसूचीत होना चाहिए था । (6) वर्ष 2000 में ग्राम पंचायत रायपुर पण्डित सामान्य पुरुष , 2005 में सामान्य महिला , 2010 में पिछड़ी पुरुष और वर्ष 2015 ( जब बेलौही और रायपुर पंडित अलग – अलग ग्राम पंचायत हो गयी ) सामान्य पुरुष आरक्षित हुआ , जबकि वही बेलवही ( बेलौही ) वर्ष 1995 में भी अनुसूचित और 2015 में भी अनुसूचित आरक्षित हुआ है । जिसको देखते हुये से उपरोक्त आपत्ति का जाँच कर वर्ष 1995-2000 के मध्य कार्यकाल में संशोधित ग्राम पंचायत रायपुर पण्डित को वर्ष 1995 में हुये अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए ,उक्त लाभ आरक्षण के समय स्थित नाम ग्राम पंचायत बेलवही ( बेलौही ) को मिलना प्राकृतिक नियम का अनुपालन और न्यायोचित होगा ।

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