गोरखपुर

5 जून को 3 घंटे 18 मिनट के लिए लगेगा उपच्छाया चंद्रग्रहण

खगोलीय घटनाओं में रूचि रखने वाले लोगों के लिए पांच जून को लगने वाला उपच्छाया चंद्रग्रहण खास होगा। इस दौरान तीन घंटे तक पृथ्वी की उपच्छाया में चंद्रमा रहेगा। इस स्थिति में चांद पर धुंधली सी परत नजर आती है। चांद के आकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मगर पूर्णमासी की वजह से चांद की खूबसूरती अपने शबाब पर होगी। रात 11:23 मिनट पर चंद्रग्रहण शुरू होगा। जो देर रात 2:34 बजे तक रहेगा।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उपच्छाया चंद्रग्रहण को (पैनुब्रल एक्लिप्स) कहा जाता है। पांच और छह जून दरमियानी रात लगने वाले ग्रहण में 12:54 मिनट पर ग्रहण अपने चरम पर होगा। 27 दिन के अंदर चंद्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा को पूरा करता है।

चक्कर लगाने के दौरान जब चंद्रमा धरती और सूर्य के बीच में आ जाता है तो चंद्रग्रहण होता है। एक कैलेंडर वर्ष में छह से सात ग्रहण लगते हैं। इनमें सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण दोनों शामिल होते हैं।  

क्या है चंद्रग्रहण
 चंद्रमा का खुद का प्रकाश नहीं होता है। सूर्य से परावर्तित प्रकाश के कारण ये ज्यादा चमकदार नजर आता है। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। तब चंद्रमा पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश को ढक लेती है। इस खगोलीय घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है।

 तीन तरह के होते हैं चंद्रग्रहण
पूर्ण चंद्रग्रहण – पृथ्वी की छाया जब पूरी तरह से चंद्रमा पर पड़ती है। तब पूर्ण चंद्रग्रहण लगता है। इसे नंगी आंखों से बेहद आसानी से देखा जा सकता है।
आंशिक चंद्रग्रहण – पृथ्वी की छाया जब आंशिक रूप से चंद्रमा पर पड़ती है तो आंशिक चंद्रग्रहण लगता है। इसे भी बिना दूरबीन के देखा जा सकता है।  
उपच्छाया चंद्रग्रहण – जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया की हल्की उपच्छाया से गुजरता है तो उपच्छाया चंद्रग्रहण लगता है। उपच्छाया चंद्र ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है। इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबर

To Top